On work and love

वो काम भला क्या काम हुआ जिसमे चीखों की आशा हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ जो मज़हब , रंग और भाषा हो

वो काम भला क्या काम हुआ जो चंद्रशेख आज़ाद न हो
वो इश्क़ भला क्या इश्क़ हुआ जो भगत सिंह की याद न हो

Can anyone write the complete poetry that Piyush Mishra recited at the FTII which was in reply/continuation or interpretation to Faiz Ahmed Faiz’s Kuch Ishq, Kuch Kaam